Tuesday, August 26, 2008

मेरे किसी ख्वाब में

ऐसा नहीं कि,
तेरी याद में,
ये आंखे रोई नहीं,
इनको सज़ा मिली है,
ये अभी तक, सोई नहीं,
ये एक वक्त से खुली हैं,
बस इस इंतज़ार में,
शायद तू नज़र आए इन्हें,
मेरे किसी ख्वाब में।
................
प्रीती बङथ्वाल "तारिका"

43 comments:

  1. Bahut sundar,, Aaj humne bhi apne jeevan mein pahli baar Kavita likhne ka prayas kiya....

    Aap hume bhi acha acha likhna sikha dijiye

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    मेरी पहली कविता...... अधूरा प्रयास

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  2. जितनी खूबसूरत रचना उतना ही खूबसूरत चित्र प्रस्तुत किया है आपने...ये आपके रचनाशीलता के विस्तार को दर्शाता है...बहुत खूब...बधाई.
    नीरज

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  3. बेहतरीन लिखा है आपने

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  4. शायद तू नज़र आए इन्हें,
    मेरे किसी ख्वाब में।


    सुन्दरतम !! पुरे जग की गहराई
    और विस्तार लिए हुए ! अच्छा लगता है
    आपकी कविता को गुन गुनाते रहना !

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  5. आप सभी का आभार।

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  6. ये एक वक्त से खुली हैं,
    बस इस इंतज़ार में,
    शायद तू नज़र आए इन्हें,
    मेरे किसी ख्वाब में...
    bahut hi ache bhavon ke sath likha hai...
    acha laga padh kar...
    jari rahe

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  7. This comment has been removed by the author.

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  8. शायद तू नज़र आए इन्हें,
    मेरे किसी ख्वाब में।

    ख्वाब में देखने के लिए तो सोना होगा ,
    ऐसे ही मजाक कर दिया........ बहुत अच्छी कविता है।

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  9. बहुत ही खूबसूरत लिखा हैं। कम शब्दों में बहुत कुछ् कह जाती है। आपके कहे जज्बात ओस की बूंद से लगते हैं।

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  10. bahut hi sundar....chitra aur bhaav dono

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  11. आंखे रोई नहीं,
    इनको सज़ा मिली है,
    ये अभी तक, सोई नहीं,
    ये एक वक्त से खुली हैं,
    बस इस इंतज़ार में,
    शायद तू नज़र आए इन्हें,
    मेरे किसी ख्वाब में।

    अच्छा लिखा है प्रीति...हालांकि तुम्हे पहले पढ़कर ...तुमसे मेरी उम्मीदे ज्यादा है

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  12. बहुत अच्छा लिखा है. सस्नेह

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  13. प्रीति, क्या सुन्दर लिखा है, लाजवाब, बेहतरीन

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  14. संगीता जी, किस ने कहा ख्वाब देखने के लिये सोना जरूरी है। हमने तो सारे सुन्दर सपने ही खुली आंखों से देखे हैं। और हाँ दिवास्वप्न देखने के लिये तो आँखे खुली रखना अनिवार्यता है। हमने भी ऐसे ही मजाक कर दिया ;)

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  15. यह रचना ऐसी है कि मानो सलाइयों से बुना स्वेटर!

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  16. बस इस इंतज़ार में,
    शायद तू नज़र आए इन्हें,
    मेरे किसी ख्वाब में।


    -खूबसूरत...बहुत उम्दा...वाह!

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  17. "शायद तू नज़र आए इन्हें,
    मेरे किसी ख्वाब में।"

    बहुत अच्छा है ... अपनी न जाने कब लिखी ग़ज़ल का एक शेर याद आ गया :

    "तू अभी ख्वाब है तो अच्छा है
    सच जो हो जाए तो फिर क्या होगा"

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  18. बहुत ही भावुक कविता अति सुन्दर,
    धन्यवाद

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  19. बहुत ही सुंदर,मार्मिक और भावुक कविता जारी रहे।
    आप की कलम में जादू है, प्रीती जी।

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  20. Beautiful poem from a lovely & sensitive heart.
    warm regards,
    - Lavanya

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  21. आपकी संवेदनशीलता को पूरा सम्मान देते हुए यह कहने इजाजत चाहता हूं कि निरंतर लिखें, स्वमूल्यांकन करें और निरंतर अच्छा पढते भी रहें.

    आपकी रचनाशीलता जारी रहे! इंतजार रहेगा नई रचनाओं का.

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  23. aapne to lata mangeshker ko bhi piche
    ker diya aisa to ve kabhi nahi likh pai.kitna dard hai aap ki rachnav me
    -bahut,bahut sunder.
    alok toomer

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  24. alok ji aap bhi mauj le rahe hai.hindi patrkarita ke shirsh per pahuchne se pahle aap girls college me padhate the.yeh to bacha bacha janta hai ki lata mangeshker kavita likhti nahi gati thi.per in mohtarma ko jo yeh post delet ker dengi unhe kafi mugalta hai apne bare me aur thalua baithe log gazab ki champi ker rahe hai.jai ho mahadevi verma ki.
    ravish kumar

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  25. maidam aap juti rahiye kunthit log to jalte hai .aap to meena kumari se aage jayengi.pakiza me unki kavita aap ki kavita aage bekar hai.
    kumar sanjoy

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  26. yeh beech beech me coment delet kyo ho ja rahe hai.mitha mitha kha kadua kadua delet.
    ajit anjum

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  27. blog ke khel me 20 peshever tippanikar hai jisme 15 to kisi ladki ya mahila ka post aate hi maidan me aa jate hai inse jo savdhan na hua vah mara jata hai .aap kavita kare per jhothii chatukarita se bachke rahe .vaise bhi blog per bhookh bhookmari aur gavn ki chinta kam kam ki jati hai.rohani dunia me jyada bhatakte hai.
    fajal

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  28. लता मंगलेशकर जी गायिका हैं ये तो जग जाहिर है। उनकी बराबरी नही की जा सकती वो तो स्वयं सरस्वती हैं। और रहा मीना कुमारी जी की बात तो वो अच्छी अदाकारा थी।
    और मैं अपने आप को अच्छी तरह जानती हूं इसलिए किसी के साथ तुलना न करें तो बहतर है। हर किसी का अपना महत्व होता है मुझे कविता का शौक है सो लिखती हूं।
    अब टिप्पणी के बारे में बताना चाहूंगी कि ये मेरे द्वारा डिलिट नही की गई है,मैं अच्छाई पढने का मन रखती हूं तो बुराई पढने का जिगर भी है मुझमें। ये गलतफहमी अपने मन से निकाल दें कि मीठा-मीठा खा और कङवा-कङवा डिलीट
    जिगर तो उन में नही है जो अपना url न दे कर अंजान नाम से इस तरह की टिप्पणी करते है।

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  29. dipti ji aap ki kavita bahur khubsurut hai.kuch vighnsantoshi tatvo ke chalte aap nirash na ho,hum aap ke sath hai.
    ambrish kumar

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  30. ji jigar to hamara kamjor hai.per url aap ne bhi nahi diya hai.

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  31. बहुत सुंदर रचना .....

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