Tuesday, August 12, 2008

मेरे आगोश में........

कुछ तो बात होगी,
जो, खामोश तन्हाईयां हैं,
मेरे आगोश में जाने,
ये किसकी,
बिलखती परछाईयां हैं।
जो मेरे आंसूओं को,
अपनी यादों में डुबो रही हैं,
शायद, वो भी मेरी तन्हाईयों में,
मेरे साथ रो रहीं हैं।
जिसकी सिसकियां मेरे दर्द की,
आवाज़ बन गई हैं,
जिसकी मुस्कुराहट मेरे आंसुओं का,
टूटा साज़ बन रही हैं।
जाने ये कौन-सी तन्हाईयां हैं,
मेरे आगोश में जाने,
ये किसकी,
बिलखती परछाईयां हैं।
............
प्रीती बङथ्वाल "तारिका"

11 comments:

  1. प्रीति जी,


    बेहद प्रशंसनीय रचना है, बधाई स्वीकारें..


    ***राजीव रंजन प्रसाद
    www.rajeevnhpc.blogspot.com
    www.kuhukakona.blogspot.com

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  2. मेरे आगोश में जाने,
    ये किसकी,
    बिलखती परछाईयां हैं।


    गहरी टीस है !

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  3. वाह!!
    बहुत खूब!!

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  4. बहुत मार्मिक रचना है...बहुत सुंदर प्रस्तुतीकरण.
    नीरज

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  5. एक मार्मिक कविता ओर बहुत ही सुन्दर भाव, धन्यवाद

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  6. parchayiyan, tanhayiya..
    achchi rachanaa hai..dard ki..

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  7. kuch to baat hogi jo kahmosh tanhiya, mere agosh main ye kiski bilakhti parchiya hai,

    wah wah very good

    very good preeti ji


    keep it up

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