Wednesday, August 13, 2008

तुमने, मुझे थाम लिया है।

तुम मेरे पास ही हो,
ये एहसास है मुझे,
कि अपने हाथों से,
तुमने, मुझे थाम लिया है,

जब भी डरता हूं,
तुम्हारी गोद में आ जाता हूं,
और अपनी आंखों को,
नन्हें हाथों से बंद कर लेता हूं,

मेरा रोना, तुम्हें,
बेचैन-सा कर देता है,
और एक शरारत,
मुस्कान-सी भर देता है,

मेरी तोतली बोली को,
बङे ध्यान से सुनते हो,
और बेतुके सवालों का,
तुम जवाब भी देते हो,

तुम मेरे पास ही हो,
ये एहसास है मुझे।
.............

प्रीती बङथ्वाल "तारिका"

24 comments:

  1. खूबसूरत अहसास से भरी कविता,अच्छा लिखा है आपने,
    तुम मेरे पास ही हो,
    ये एहसास है मुझे,
    कि अपने हाथों से,
    तुमने, मुझे थाम लिया है,
    विषेशकर यह पंक्तियाँ

    ReplyDelete
  2. प्रीति जी
    आज आपके ब्लॉग पर शायद पहली बार आई. इतनी सुंदर रचनाये मैंने कैसे अब तक नही पढ़ी. क्षमा चाहती हूँ. परन्तु आगे बनी रहूगी. वाकई बहुत सुंदर लिखती है आप. अति उत्तम रचना है ये.

    ReplyDelete
  3. जब भी डरता हूं,
    तुम्हारी गोद में आ जाता हूं,
    और अपनी आंखों को,
    नन्हें हाथों से बंद कर लेता हूं,
    good one preetiji continue writing

    ReplyDelete
  4. बहुत सुंदर लिखा है आपने

    तुम मेरे पास ही हो,
    ये एहसास है मुझे,
    कि अपने हाथों से,
    तुमने, मुझे थाम लिया है,

    ReplyDelete
  5. तुम मेरे पास ही हो,
    ये एहसास है मुझे।


    बहुत शानदार ! शुभकामनाएं !

    ReplyDelete
  6. Bahut hi acha likhti hain...
    apka blog na jane kahan chipa tha...
    chalo aaj Rashmi ji ke blog ki wjh se apka blog samne aa hi gaya...
    bahut hi acha likhti hain..
    apke pass shabdo ki bahut achi takat hai..
    apko inse khelna ata hai..
    apki ek-ek kavita bahut achi hai
    ummeed karta hoon age bhi ye padhne ko milti rahengi...

    ReplyDelete
  7. Nischay hi aapki rachna achhi hai.
    Blog par bhi itni achhi rachnayen padhneko miljaati hai.
    Aise hi likhti rahen.

    ReplyDelete
  8. आपकी कविता "तुमने मुझे थाम लिया है" एक ऐसे वैश्विक परिदृश्य का पुनर्लेखन करती है जिसे हम विस्मृत कर चुके होते हैं पर जो हमारे अवचेतन में हमेशा बना रहता है. शिशु में ईश्वरत्व के दर्शन जिसने पहली बार किए होंगे वो बड़ा दृष्टा रहा होगा. शैशव के कार्य-कलापों में परम सत्ता के प्रति आत्म-समर्पण की सहज वृत्ति दृष्टव्य होती है. एक शिशु एक महान गुरु होता है, बशर्ते उसके संकेतों को ग्रहण किया जाए.
    गहन दार्शनिक भाव-बोध की यह अभिव्यक्ति श्लाघ्य है.
    आपकी अन्य रचनाएं पढने की व उन पर टिप्पणी करने की उत्कंठा प्रबल हुई है.
    सद्भाव सहित-
    आनंदकृष्ण, जबलपुर.
    मोबाइल : 09425800818

    ReplyDelete
  9. आपकी कविता "तुमने मुझे थाम लिया है" एक ऐसे वैश्विक परिदृश्य का पुनर्लेखन करती है जिसे हम विस्मृत कर चुके होते हैं पर जो हमारे अवचेतन में हमेशा बना रहता है. शिशु में ईश्वरत्व के दर्शन जिसने पहली बार किए होंगे वो बड़ा दृष्टा रहा होगा. शैशव के कार्य-कलापों में परम सत्ता के प्रति आत्म-समर्पण की सहज वृत्ति दृष्टव्य होती है. एक शिशु एक महान गुरु होता है, बशर्ते उसके संकेतों को ग्रहण किया जाए.
    गहन दार्शनिक भाव-बोध की यह अभिव्यक्ति श्लाघ्य है.
    आपकी अन्य रचनाएं पढने की व उन पर टिप्पणी करने की उत्कंठा प्रबल हुई है.
    सद्भाव सहित-
    आनंदकृष्ण, जबलपुर.
    मोबाइल : 09425800818

    ReplyDelete
  10. बहुत ही प्यारे जज्बात। सच ऐसा ही होता हैं। पढकर अपनी बेटी की याद आ गई। आजकल अपनी नानी के पास गई हुई हैं।

    ReplyDelete
  11. तुम मेरे पास ही हो,
    ये एहसास है मुझे,
    कि अपने हाथों से,
    तुमने, मुझे थाम लिया है,
    very different poem full of feelings

    ReplyDelete
  12. तुम मेरे पास ही हो,
    ये एहसास है मुझे।


    --एक नाजुक एहसास. वाह, बहुत सुन्दर, बधाई.

    ReplyDelete
  13. बहुत ही सुन्दर कविता,मेरे बच्चे अभी तो बडे हो गये हे , फ़िर भी जब मुस्किल मे पढते हे तो बिलकुल आप की कविता की तरह से मेरे आस पास मडराते हे, ओर मे समझ जाता हु, फ़िर अपने पास बिठा कर सर मे हाथ फ़ेर कर प्यार से बात पुछ लेता हु, ओर उन्हे फ़िर से हिम्मत आ जाती हे, बहुत बहुत धन्यवाद, इस प्यारी सी कविता के लिये

    ReplyDelete
  14. ye ehsaas mujhe bhi hai, kavita bahut sunder hai hamesha ki terah khoobsurat bhav liye hue.

    mere blog me aane aur tipyaane ke liye shukriya, aasha hai aage bhi aati rahengi.

    ReplyDelete
  15. ati sundar rachanaa taarika ji.. badhayee..

    ReplyDelete
  16. Priti ji, your poetry is touching my heart. thanks.

    ReplyDelete
  17. bauht hi sunder

    dher sari badhiya

    ReplyDelete
  18. तुम मेरे पास ही हो,
    ये एहसास है मुझे,
    कि अपने हाथों से,
    तुमने, मुझे थाम लिया है,

    Bahut achchhi line hai.
    Badhai

    ReplyDelete
  19. "मेरी तोतली बोली को,
    बङे ध्यान से सुनते हो,
    और बेतुके सवालों का,
    तुम जवाब भी देते हो,"
    ... बहुत अच्छा

    ReplyDelete
  20. आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद।

    ReplyDelete

मेरी रचना पर आपकी राय