Friday, November 21, 2008

क्यों तुम मुझसे रुठे हो।





पापा....क्यों मुझसे रुठे हो,
क्या...मैं नहीं हूं तुम्हारी,
मां.....क्यों ना मुझसे बोल रही,
जब मिली तुमसे ही सांस हमारी।।


क्यों ना अपनाते मुझको,
क्यों ना होती परवाह मेरी,
क्यों ना तुम भैया के जैसे,
मुझको भी लोरी सुनाती हो।।

दो जवाब, इन कलियों को,
क्यों न खिलने देते तुम,
मन में लिए प्रश्न कई,
पूछ रहा अधखिला “वो” फूल।।
..........

प्रीती बङथ्वाल "तारिका"
(चित्र- साभार गूगल)

29 comments:

  1. भावपूर्ण रचना है। कहते हैं कि-

    महिला-मुक्ति आन्दोलन का समाज पे इतना प्रभाव है।
    कि जन्म से पहले ही मुक्ति का प्रस्ताव है।।

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    मुश्किलों से भागने की अपनी फितरत है नहीं।
    कोशिशें गर दिल से हो तो जल उठेगी खुद शमां।।
    www.manoramsuman.blogspot.com

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  2. beti ko kokh me maroge to bahu kahan se laoge. samvedansheel man kee bhav se ot prot rachna
    narayan narayan

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  3. क्यों ना तुम भैया के जैसे,
    मुझको भी लोरी सुनाती हो।।

    बहुत सारगर्भित, सामयिक और संदेश देती रचना ! आज के समय में इन सवालों और रचनाओं की शिद्दत से समाज को जरुरत है ! अवश्य लिखी जानी चाहिए ! इस विषय पर नियमित लिखिए ! बहुत शुभकामनाएं !

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  4. दो जवाब, इन कलियों को,
    क्यों न खिलने देते तुम,
    मन में लिए प्रश्न कई,
    पूछ रहा अधखिला “वो” फूल।।
    " hi, very emotional to read... bt a fact too"

    Regards

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  5. दो जवाब, इन कलियों को,
    क्यों न खिलने देते तुम,


    भावपूर्ण रचना.

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  6. बहुत अच्छा लिखा है आपने.

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  7. heya..a gud poem..a common topic..keep it up..
    do comment on ma blog wil hel me improve...

    www.arenaoflife.blogspot.com

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  8. दो जवाब, इन कलियों को,
    क्यों न खिलने देते तुम,
    मन में लिए प्रश्न कई,
    पूछ रहा अधखिला “वो” फूल।।

    bahut accha
    regards

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  9. bahut achchhi rachana hai. photo se bahut achchha prbhav ban pada hai.

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  10. बहुत अच्छे! क्या बात है!!

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  11. वाह बहुत बढ़िया लिखा है।

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  12. दो जवाब, इन कलियों को,
    क्यों न खिलने देते तुम,
    मन में लिए प्रश्न कई,
    पूछ रहा अधखिला “वो” फूल।।

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  13. ये बात हुई ना बात तारिका जी,
    कौन हूँ, गंगा मैय्या को भी पढ़ा जी, बहुत सुंदर अभिव्यक्तियाँ कर रही हैं जी आप. बच्ची की बड़ी प्यारी तस्वीरों के साथ उसका मासूम सा सवाल, बहुत बड़ी बात बड़े संजीदा लहजे में पेश हुए यहाँ. आप ऐसे ही लिखते रहें. बहुत बधाई और शुभकामनाएँ.

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  14. बहुत सुंदर.
    धन्यवाद

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  15. bahot khub likha hai aapne bahot sundar aur saral rachana behatar bhav bhare............

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  16. अधखीले फूलों की भावनाओं को मजबूती से रखा है आपने. बधाई.

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  17. javaab kahaan dete hain paapaa... nispand rah jaate hain....apne hi apraadhbodh se bhare...

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  18. बहुत सुंदर प्रस्तुति अद्भुत शब्द प्रवाह
    हर बार की तरह लाज़बाब

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  19. काश दुष्ट समाज कुछ प्रेरणा ले

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  20. bhavnao se prot rachna........
    dil janjhornee wali rachna,,,,,

    मैंने मरने के लिए रिश्वत ली है ,मरने के लिए घूस ली है ????
    ๑۩۞۩๑वन्दना
    शब्दों की๑۩۞۩๑

    आप पढना और ये बात लोगो तक पहुंचानी जरुरी है ,,,,,
    उन सैनिकों के साहस के लिए बलिदान और समर्पण के लिए देश की हमारी रक्षा के लिए जो बिना किसी स्वार्थ से बिना मतलब के हमारे लिए जान तक दे देते हैं
    अक्षय-मन

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  21. काश हत्यारे माता-पिता भी इस पुकार को सुन पाते और अजन्मी संतान को जीवन की मामूली असुविधाओं के बदले बलि देने से बच पाते!

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  22. nice blog keep it up

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  23. बहुत ही भावभीनी रचना है।बहुत सुन्दर!!

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  24. जीवन िस्थितयों को आपने बडे यथाथॆपरक ढंग से शब्दबद्ध िकया है । अच्छा िलखा है आपने । शब्दों में यथाथॆ की अिभव्यिक्त है । साथ ही कई प्रश्न उठाकर आपने सामाियक संदभोॆं से मन को झकझोर िदया है । मैने अपने ब्लाग पर एक लेख िलखा है । समय हो तो पढें और प्रितिक्रया भी दें -
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  25. beti ke dard ko bahut hi sundar dhang se prastut kiya hai aapne..........kyun samaj aaj bhi beti ko ek abhishap manta hai..........yatharth ka bodh karati hai aapki kavita

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