Friday, July 10, 2009

यूं ख्वाब रोज सजाया करो...........

जो होंठो को मुस्कान दे,
उन्हीं लम्हों को,
आंखों में बसाया करो,
सलवटें न पङ जाए,
उनमें कभी,
इन्हें रोज सुलझाया करो,
ख्वाब ही तो हैं मासूम से,
धुंधले न हो जाए कहीं,
ये ख्वाब रोज,
पलकों पे सजाया करो।
..........
प्रीती बङथ्वाल "तारिका"
(चित्र- साभार गूगल)

25 comments:

Tarkeshwar Giri said...

बहुत ही अच्छे शब्दों का और सलीके से इस्तेमाल किया है आपने अपने कविता मैं. अच्छा लगा. Blog : www.taarkeshwargiri.blogspot.com

मीत said...

सलवटें न पङ जाए,
उनमें कभी,
इन्हें रोज सुलझाया करो,
बहुत खूबसूरत लिखा है...
बधाई...
मीत

नारदमुनि said...

sach much,ye nahin to zindagi niras ho jayegi. narayan narayan

काजल कुमार Kajal Kumar said...

बहुत सुंदर.

ताऊ रामपुरिया said...

बेहद सुंदर रचना. शुभकामनाएं.

रामराम.

नीरज गोस्वामी said...

वाह प्रीती जी...बहुत सुन्दर रचना...
नीरज

महेन्द्र मिश्र said...

बहुत सुन्दर रचना...

राज भाटिय़ा said...

एक बहुत खुब सुरत रचना
धन्यवाद

रंजना [रंजू भाटिया] said...

बहुत सुन्दर रचना

अनिल कान्त : said...

Nice one !!

रंजना said...

बहुत खूबसूरत रचना...वाह !!!

बधाई...

जितेन्द़ भगत said...

सुंदर मोहक भाव।

mehek said...

ख्वाब ही तो हैं मासूम से,
धुंधले न हो जाए कहीं,
ये ख्वाब रोज,
पलकों पे सजाया करो।
aafrin,bahut sunder.

"अर्श" said...

khoobsurat bhav ke saath sundar rachanaa ji badhaayee


arsh

मीत said...

बहुत ख़ूब !!

महफूज़ अली said...

धुंधले न हो जाए कहीं,
ये ख्वाब रोज,
पलकों पे सजाया करो।


Bahut achch iline hai........khwaab hote hi sajaane ke liye.........

Ati sundat kavita

mukesh said...

क्या बात है , कम शब्दों में कितना ज्यादा कह दिया आपने . वाकई काबिलेतारीफ है!

SURINDER RATTI said...

ख्वाब ही तो हैं मासूम से,
धुंधले न हो जाए कहीं,
ये ख्वाब रोज,
पलकों पे सजाया करो।
Bahut sunder ....
Surinder

HEY PRABHU YEH TERA PATH said...

15/07/2009

प्रीतिजी बड़थ्वाल जन्म दिन मुबारक हो।
आभार/ महलकामनाओ सहित
हे प्रभु यह तेरापन्थ
मुम्बई टाईगत
15/07/2009

HEY PRABHU YEH TERA PATH said...

भुल सुधार करे
आभार/ महलकामनाओ सहित == आभार/ शुभकामनाओ सहित
हे प्रभु यह तेरापन्थ
मुम्बई टाईगत

अनूप शुक्ल said...

सुन्दर। जन्मदिन मुबारक!

इष्ट देव सांकृत्यायन said...

बहुत ख़ूब!!

नीरज जाट जी said...

priti ji, aapka janmdin tha or apne bataya bhi nahin.

Rahul Ranjan said...

Tarikaji,
Ek sondhi si khushbu or ek naya rupantaran apne kia... ek or sundar rachna ke lie anekanek badhaiya....

aap gile kagaj par shyahi rakhi he or wo ek khubsurat kalakruti ban jati he...
shubechaye....

Rahul Ranjan said...

Ohh Belated happy B'day - *

Post a Comment

मेरी रचना पर आपकी राय