Friday, July 31, 2009

शायद ये ख्वाब वाली, नई उम्र हो जैसे..........





जिस रात में, मिली थी,
मुझसे मेरी महोब्बत,
उस रात ही कहीं पे,
दिल खो दिया था मैंने।



बन फूल, खिल रही थी,
तितली-सी उङ रही थी,
होठों की एक हंसी ने,
मन छू लिया हो जैसे।



बिन घुंघरूओं के बजती,
पैरों में अब तो पायल,
मैं नाचती थिरकती,
दिल झूमता है ऐसे।



लगने लगा है सबकुछ,
अब तो नया-नया सा,


शायद ये ख्वाब वाली,
नई उम्र हो जैसे।

.............

प्रीती बङथ्वाल “तारिका”
(चित्र - साभार गूगल)

16 comments:

  1. होठों की एक हंसी ने,
    मन छू लिया हो जैसे

    बहुत अच्छी लगी।

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  2. अपने थिरकते मन के भाव का बेहतर इजहार किया है आपने।

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    www.manoramsuman.blogspot.com
    shyamalsuman@gmail.com

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  3. गहन अनुभूति की सहज अभिव्यक्ति ! काबिले तारीफ़ !

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  4. शायद ये ख्वाब वाली,
    नई उम्र हो जैसे।

    .............

    -क्या बात है...गज़ब!! बहुत खूब रचा!

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  5. लगने लगा है सबकुछ,
    अब तो नया-नया सा,

    शायद ये ख्वाब वाली,
    नई उम्र हो जैसे।
    बहुत खूब सूरत प्रेनभिव्यक्ति है बधाई

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  6. शायद ये ख्वाब वाली,
    नई उम्र हो जैसे।

    बहुत सुंदर.

    रामराम.

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  7. bade pyari ehsaas ko prastut kiya aapne..
    sundar bhav se saji sundar kavita..
    dhanywaad..

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  8. SHAYAD YE KHWAB WAALI NAYEE UMRA HO JAISE..GAZAB KI BAAT KAHI HAI AAPNE...PREETEE JI BAHOT BAHOT BADHAAYEE IS SANJIDAGEE KE LIYE... KYA BAAT HAI KYA BAAT HAI WAAH...



    ARSH

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  9. मन को मओह लेने का सामार्थ्य है इस रचना में!

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  10. ख्वाबों की उम्र ऐसी ही होती है प्रीती जी ...

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  11. कम शब्दों में समाहित भाव लाजवाब..........

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  12. शायद ये ख्वाब वाली,
    नई उम्र हो जैसे।
    ==
    बेहतरीन
    सुन्दर रचना

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  13. लगने लगा है सबकुछ,
    अब तो नया-नया सा,


    शायद ये ख्वाब वाली,
    नई उम्र हो जैसे।

    बहुत खुब। सुन्दर रचना।
    .............

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  14. अच्छा लिखा है आपने । भाव, विचार और सटीक शब्दों के चयन से आपकी अभिव्यक्ति बड़ी प्रखर हो गई है।

    मैने अपने ब्लाग पर एक लेख लिखा है-इन देशभक्त महिलाओं के जज्बे को सलाम-समय हो तो पढ़ें और कमेंट भी दें-

    http://www.ashokvichar.blogspot.com

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  15. लगने लगा है सबकुछ,
    अब तो नया-नया सा,



    शायद ये ख्वाब वाली,
    नई उम्र हो जैसे।

    bahut hi khoobsoorat lines hain........
    poori kavita sampoorn hai......

    maine bhi kuch new post likhi hain........... zara dekhiyega zaroor.......

    Regards........

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