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Monday, June 28, 2010
कहना है आसान मगर...........
कहना है आसान,
मगर....,
वो शब्द नहीं आते,
दिल दे दिया उन्हें,
यही हम....,
कह नहीं पाते।
दबा कर दातं में,
दुपट्टे का वो कोना,
लटों को....,
उंगलियों में फिर घुमाते,
छुपाये ख्वाब को..,
न देखे कोई भी..,
वो परदे के पीछे,
चेहरा यूं छुपाते।
न मांगे फिर दुआ...,
कोई हम ख़ुदा से,
बस वो एक ख्वाब ये,
सच सा बना दे,
न बोले हम,
मगर वो, सब समझले,
जो दिल हम दे चुके हैं,
कब का उनको,
वो दिल,
वो कबूल करले...,
चुपके चुपके........चुपके चुपके।
...............
प्रीती बङथ्वाल “तारिका”
(चित्र – साभार गूगल)
Saturday, August 29, 2009
कुछ प्यार की बातें होती............
सबसे पहले तो बहुत दिनों बाद आने के लिए आप सभी से माफी चाहूंगी। अब क्या करें कम्प्यूटर ही चलने को राजी नहीं था। जैसे ही ऑन करते शुरू होने से पहले ही बन्द हो जाता। बहुत हाथ जोङने के बाद अब इसका मूड ठीक हुआ है तो इससे पहले कि ये दुबारा बिदके अपनी पोस्ट डाल रही हूं ।
कुछ प्यार की बातें होती,
तो अच्छा था,
कुछ टकरार की बातें होती,
तो अच्छा था,
मन मचल-मचलता होता,
तो अच्छा था,
कुछ दिल भी थिरकता होता,
तो अच्छा था,
कहना तुम भी चाहते,
और हम भी थे,
बस बात शुरू तो होती,
तो अच्छा था,
कुछ प्यार की बातें होती,
तो अच्छा था,
कुछ टकरार की बातें होती,
तो अच्छा था,
मन मचल-मचलता होता,
तो अच्छा था,
कुछ दिल भी थिरकता होता,
तो अच्छा था,
कहना तुम भी चाहते,
और हम भी थे,
बस बात शुरू तो होती,
तो अच्छा था,
यूं बीत गया चुपके से,
ये सारा दिन,
ये दिन ना बीता होता,
तो अच्छा था।
कुछ प्यार की बातें होती,
तो अच्छा था।
ये सारा दिन,
ये दिन ना बीता होता,
तो अच्छा था।
कुछ प्यार की बातें होती,
तो अच्छा था।
..............
प्रीती बङथ्वाल “तारिका”
(चित्र- साभार गूगल)
Friday, July 31, 2009
शायद ये ख्वाब वाली, नई उम्र हो जैसे..........

जिस रात में, मिली थी,
मुझसे मेरी महोब्बत,
उस रात ही कहीं पे,
दिल खो दिया था मैंने।
बन फूल, खिल रही थी,
तितली-सी उङ रही थी,
होठों की एक हंसी ने,
मन छू लिया हो जैसे।
बिन घुंघरूओं के बजती,
पैरों में अब तो पायल,
मैं नाचती थिरकती,
दिल झूमता है ऐसे।
लगने लगा है सबकुछ,
अब तो नया-नया सा,
शायद ये ख्वाब वाली,
नई उम्र हो जैसे।
.............
प्रीती बङथ्वाल “तारिका”
(चित्र - साभार गूगल)
Tuesday, May 5, 2009
मैं प्यार का समन्दर..........

अहसास में, डुबो कर,
प्यार की, कलम से,
लिख दिए, जज़्बात,
जो खिल रहे, कमल से।
मैं डोर से बंधी हूं,
तेरे प्यार का है बंधन,
तुम डूब जाओ मुझमें,
मैं प्यार का समन्दर।
मैं मोम-सी पिघल कर,
तेरी सांसों में बसूंगी,
तुम जबभी पलके मूंदों,
बस मैं ही मैं दिखूंगी।
दिल कह रहा है तुमसे,
बस याद मुझको आना,
वर्ना यूं अनबन होगी,
मेरी नजर की, तेरी नजर से।
............
प्रीती बङथ्वाल "तारिका"
(चित्र- साभार गूगल)
Monday, April 27, 2009
कभी वक्त मिले मुझसे, तुम मिलने आ जाना.....
जज़्बात महोब्बत के,
सीने में धङकते हैं,
फुरसत में कभी तुम भी,
इससे सुनने आ जाना।
मैं तन्हा हूं फिर भी,
कुछ बाते करती हूं,
कभी वक्त मिले,
मुझसे,
तुम मिलने आ जाना।
रह-रह के मचलता र्है,
आंखों में जो बसता है,
वो सपना बनकर के,
तुम मुझको सुला जाना।
मैं नींद में रहकर भी,
कुछ देखा करती हूं,
तुम पास मेरे आकर,
कभी मुझको जगा जाना।
फिर खोल के जुल्फों को,
सुलझाने बैठूं तो,
तुम अपने हाथों से,
इनको सहला जाना।
इन काले केसू में,
कुछ सूनापन सा है,
एक फूल महोब्बत का,
चुपके से लगा जाना।
बारिश के मौसम में,
जब भीग रहे हो तुम,
बस अपना समझकर के,
मुझे पास बुला लेना,
मैं आदत से अपनी,
कुछ शरमा जाऊं तो,
तुम बाहों में भरकर,
मुझे गले लगा लेना।
सीने में धङकते हैं,
फुरसत में कभी तुम भी,
इससे सुनने आ जाना।
मैं तन्हा हूं फिर भी,
कुछ बाते करती हूं,
कभी वक्त मिले,
मुझसे,
तुम मिलने आ जाना।
रह-रह के मचलता र्है,
आंखों में जो बसता है,
वो सपना बनकर के,
तुम मुझको सुला जाना।
मैं नींद में रहकर भी,
कुछ देखा करती हूं,
तुम पास मेरे आकर,
कभी मुझको जगा जाना।
फिर खोल के जुल्फों को,
सुलझाने बैठूं तो,
तुम अपने हाथों से,
इनको सहला जाना।
इन काले केसू में,
कुछ सूनापन सा है,
एक फूल महोब्बत का,
चुपके से लगा जाना।
बारिश के मौसम में,
जब भीग रहे हो तुम,
बस अपना समझकर के,
मुझे पास बुला लेना,
मैं आदत से अपनी,
कुछ शरमा जाऊं तो,
तुम बाहों में भरकर,
मुझे गले लगा लेना।
............
प्रीती बङथ्वाल "तारिका"
(चित्र- साभार गूगल)
Saturday, April 25, 2009
ये इश्क नहीं आसां बस इतना समझ लीजिए.....
कहने को तो कहते हैं,
हम तोङ के लायेंगे,
इन चांद सितारों को,
भर देंगे दामन हम,
जों मोतियों की बारिश हो।
पत्थर को तराशेंगे,
नाखूनों से अपने,
जब तक न बन जाए,
मूरत मेरे माही की।
चुन लेंगे फूलों को,
तेरी महक घुली जिनमें,
फिर बन जोगी तेरा,
तेरे नाम की माला को,
होठों में फिरायेंगे।
हम तोङ के लायेंगे,
इन चांद सितारों को,
भर देंगे दामन हम,
जों मोतियों की बारिश हो।
पत्थर को तराशेंगे,
नाखूनों से अपने,
जब तक न बन जाए,
मूरत मेरे माही की।
चुन लेंगे फूलों को,
तेरी महक घुली जिनमें,
फिर बन जोगी तेरा,
तेरे नाम की माला को,
होठों में फिरायेंगे।
...........
प्रीती बङथ्वाल तारिका
(चित्र- साभार गूगल)
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