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Saturday, April 25, 2009

ये इश्क नहीं आसां बस इतना समझ लीजिए.....

कहने को तो कहते हैं,
हम तोङ के लायेंगे,
इन चांद सितारों को,
भर देंगे दामन हम,
जों मोतियों की बारिश हो।



पत्थर को तराशेंगे,
नाखूनों से अपने,
जब तक न बन जाए,
मूरत मेरे माही की।



चुन लेंगे फूलों को,
तेरी महक घुली जिनमें,
फिर बन जोगी तेरा,
तेरे नाम की माला को,
होठों में फिरायेंगे।
...........
प्रीती बङथ्वाल तारिका
(चित्र- साभार गूगल)

Friday, November 21, 2008

क्यों तुम मुझसे रुठे हो।





पापा....क्यों मुझसे रुठे हो,
क्या...मैं नहीं हूं तुम्हारी,
मां.....क्यों ना मुझसे बोल रही,
जब मिली तुमसे ही सांस हमारी।।


क्यों ना अपनाते मुझको,
क्यों ना होती परवाह मेरी,
क्यों ना तुम भैया के जैसे,
मुझको भी लोरी सुनाती हो।।

दो जवाब, इन कलियों को,
क्यों न खिलने देते तुम,
मन में लिए प्रश्न कई,
पूछ रहा अधखिला “वो” फूल।।
..........

प्रीती बङथ्वाल "तारिका"
(चित्र- साभार गूगल)

Friday, November 7, 2008

ये 'जरुरी' तो नहीं...

हम जो सोचे वही हो,
ये 'जरुरी' तो नहीं,
आज जो है वो कल भी हो,
ये 'जरुरी' तो नहीं।

सांसे कब किसे थाम ले,
जिन्दगी बन कर,
जिन्दगी भी सांसे थाम ले,
ये 'जरुरी' तो नहीं।

खिले एक फूल जब,
भंवरा भी एक खिल जाता,
रात को बंद हो,
सुबह वो मिले, ये 'जरुरी' तो नहीं।

वो आईना जो,
हर सूरत को दिखलाता,
दिल भी दिखाये, 'तारिका'
ये 'जरुरी' तो नहीं।
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प्रीती बङथ्वाल "तारिका"
(चित्र - साभार गूगल)

Sunday, September 28, 2008

टूटे फूलों से भी महक पाओगे


दर्द में भी जो हंसना चाहो,
तो हंस पाओगे,
टूटे फूलों को भी पानी में डालो,
तो उनमें भी महक पाओगे।

जिन्दगी किसी ठहराव में,
कंही रुकती नहीं,
हिम्मत जो करोगे तो
मन्जिल में दोस्तों को पाओगे,
टूटे फूलों को भी पानी में डालो,
तो उनमें भी महक पाओगे।


अरमान कभी पूरे नहीं होते,
जो देखे जाते हैं,
वो भी आंसुओं के साथ,
आंखों से निकल जाते हैं,
फिर भी, किसी की खातिर,
खुद को सवांरोगे तो,
सराहे जाओगे,
टूटे फूलों को भी पानी में डालो,
तो उनमें भी महक पाओगे।
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प्रीती बङथ्वाल "तारिका "
(चित्र-सभार गुगल)