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Monday, May 7, 2012

गर उनकी आंखों में......




अब की बारिश में,
ये ख्वाब भीग जाएंगे,
गर उनकी आखों में कहीं,
हम नजर आएंगे।     

वो कहते ही नहीं थे,
जुबा से.....कहानी अपनी,
हम अपनी कहानी में,
….उनकों बतायेंगे,
गर उनकी आखों में कहीं,
हम नजर आएंगे।
 
 प्रीती बङथ्वाल (तारिका)
                           चित्र-सोजन्य(गूगल)

Friday, November 21, 2008

क्यों तुम मुझसे रुठे हो।





पापा....क्यों मुझसे रुठे हो,
क्या...मैं नहीं हूं तुम्हारी,
मां.....क्यों ना मुझसे बोल रही,
जब मिली तुमसे ही सांस हमारी।।


क्यों ना अपनाते मुझको,
क्यों ना होती परवाह मेरी,
क्यों ना तुम भैया के जैसे,
मुझको भी लोरी सुनाती हो।।

दो जवाब, इन कलियों को,
क्यों न खिलने देते तुम,
मन में लिए प्रश्न कई,
पूछ रहा अधखिला “वो” फूल।।
..........

प्रीती बङथ्वाल "तारिका"
(चित्र- साभार गूगल)