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Monday, October 13, 2008

उसकी एक आदत की तरह


सिर्फ आंसू ही रह गये थे,
आंखों में,
उसकी एक आदत की तरह,
वो जब भी मिला तन्हाई में,
मुझसे,
तो बात हुई,
एक शिकायत की तरह,

न वो समझ सका था मुझे,
न मैं ही समझ रही थी,
वक्त ने भी समझाया हमें तो,
सिर्फ एक आंसू की तरह,
वो जब भी मिला तन्हाई में,
मुझसे,
तो बात हुई,
एक शिकायत की तरह।
..............
प्रीती बङथ्वाल "तारिका"
(चित्र - सभार गुगल )