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Friday, August 12, 2011

तुम ना आना.........


तुम क्यों नहीं आए.....
जब ख़ामोश नज़रों ने,
पुकारा था तुम्हें,
जब सिसक रहे थे ख्वाब,
और सिमट रही थी खुशियां,
तुम क्यों नहीं आए........,

तुम क्यों नहीं आए....
जब रास्ते पर,
टक-टकी लगाई आंखे,
ढूंढ रही थी,
तेरे कदमों की आहट को,
तुम क्यों नहीं आए......

अब के जब,
पत्थराई आंखे....,
पत्थर बन गई,
और सांसों की डोर,
हाथों से छूट गई,
तुम ना आना...,हां..
तुम ना आना...,
बस यूंही
अफसोस जताने को
---------
प्रीती बङथ्वाल(तारिका)
(फोटो-गूगल)


Tuesday, July 28, 2009

.......मेरी आशायें.......





अपनी मुठ्ठी में,
बादलों को बांधती हूं,
क्योंकि मैं उङना चाहती हूं।


अपनी उंगलियों में,
सितारें सजाती हूं,
क्योंकि मैं उनको छूना चाहती हूं।


अपने होंठों पे,
मोतियों को थामती हूं,
क्योंकि मैं लव्ज़ों को सजाना चाहती हूं।


अपनी आंखों में,
चांद छुपाती हूं,
क्योंकि मैं तारों सा चमकना चाहती हूं।

.............

प्रीती बङथ्वाल तारिका
(चित्र- सभार गूगल)

Thursday, January 15, 2009

मेरी तन्हाइयों में...वो कौन था?



यादों के झरोखों से ज़रा,
झांकता, वो कौन था?
मेरी तन्हाइयों में भी वो,
एक पहचान था,वो कौन था?

मैं खुद बेखबर थी,
कि अन्जान थी उससे,
जो मेरे सवालों में, ये भी एक,
सवाल था, वो कौन था?

जिसने मेरे घरौंदे में अपनी,
आस को बसाया था,
कुछ नन्ही खुशियों को घर में,
सितारों सा सजाया था,

इतने करीब थी जिसके,
फिर भी ये दूरियां थी,
कहीं न कहीं कुछ तो,
ये भी मजबूरिया थी,

क्या मैं भी उन खुशियों को अपना,
आशियां बना पांऊगी,
कहीं छूते ही उन ख्वाबों को,
बिखर तो नहीं जाऊंगी,

सोचते ही सोचते, वो अहसास,
एक विश्वास बना, वो कौन था?
मेरी तन्हाइयों में भी वो,
एक पहचान था, वो कौन था?

.............

प्रीती बङथ्वाल "तारिका"
(चित्र- सभार गूगल)