
अपनी मुठ्ठी में,
बादलों को बांधती हूं,
क्योंकि मैं उङना चाहती हूं।
अपनी उंगलियों में,
सितारें सजाती हूं,
क्योंकि मैं उनको छूना चाहती हूं।
बादलों को बांधती हूं,
क्योंकि मैं उङना चाहती हूं।
अपनी उंगलियों में,
सितारें सजाती हूं,
क्योंकि मैं उनको छूना चाहती हूं।
अपने होंठों पे,
मोतियों को थामती हूं,
क्योंकि मैं लव्ज़ों को सजाना चाहती हूं।
अपनी आंखों में,
मोतियों को थामती हूं,
क्योंकि मैं लव्ज़ों को सजाना चाहती हूं।
अपनी आंखों में,
चांद छुपाती हूं,
क्योंकि मैं तारों सा चमकना चाहती हूं।
क्योंकि मैं तारों सा चमकना चाहती हूं।
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प्रीती बङथ्वाल तारिका
(चित्र- सभार गूगल)
