न पूछो क्यों, हम नींद में,
हंसते हैं, और कभी रोते हैं,
ख्वाब में अक्सर........,
दर्द की यादों में, तो कभी,
खुशियों की महफलों में होते हैं।
यूं ही मिलते हैं हम,
जमाने से मुलाकातों में,
वर्ना तो मिलने में ही,
जमाने होते हैं,
खूबसूरत सी मुलाकात हुई हो कोई,
बस वही ख्वाब.........,
बिस्तर के सिरहाने होते हैं।
..........
(चित्र – साभार गूगल)






15 comments:
Ek prashansneeya kavita likhi aapne...
sundar srijan..
Jai Hind
बस वही ख्वाब.........,
बिस्तर के सिरहाने होते हैं।
बिस्तर का दायित्व है कि वह हर रोज सिरहाने कोई ख्वाब रख जाये. क्या शब्द चयन किया है आपने :
यूं ही मिलते हैं हम,
जमाने से मुलाकातों में,
वर्ना तो मिलने में ही,
जमाने होते हैं,
बहुत ही सुन्दर रचना
क्या बात है...उम्दा...बहुत दिनों बाद...अब नियमित हो जाओ!!
खूबसूरत सी मुलाकात हुई हो कोई,
बस वही ख्वाब.........,
बिस्तर के सिरहाने होते हैं।
mann prasann ho gaya
behad khoobsurat.....
bahut acha laga padhkar...
keep it up
meet
BAHUT HI SAHI LIKHA HAI ............JO HAMARE KHWAAB HOTE HAI WAH HAMARE CHAND MULAKATO KI HI TO DEN HOTI HAI ..........BEHAD SUNDAR RACHANA
लाजबाव, अति सुंदर रचना.
धन्यवाद
न पूछो क्यों, हम नींद में,
हंसते हैं, और कभी रोते हैं, . पूछ्ने पर भी क्या हम बता सकते है ?
अच्छा लिखा है.
Bahut Khoobsurat Rachna likhi hai aapne
behad khoobsoorat rachna......
खूबसूरत सी मुलाकात हुई हो कोई,
बस वही ख्वाब.........,
बिस्तर के सिरहाने होते हैं।
in lines ne dil chhoo liya...
aapko itne dinon ke baad dekh ke achcha laga...
बहुत सुंदर रचना.
रामराम.
शायद भगवान के पास भी आज जैसे इंसान होते तो सपनों में ही दुनिया भर की सैर कर लेते। सब से मिल आते।
खूबसूरत सी मुलाकात हुई हो कोई,
बस वही ख्वाब.........,
बिस्तर के सिरहाने होते हैं।
WOW!!
Good one, Regards,
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अरे वाह! इतने दिन बाद लिखा और उसे भी मैंने इतने दिन बाद देखा। वाह!
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