Showing posts with label अफसाना. Show all posts
Showing posts with label अफसाना. Show all posts

Wednesday, May 20, 2009

मासूम-सा दिल है ऐ "तारिका".......

कितनी बदल गई तस्वीरें,
क्या थी खुशियां क्या थे गम,
खुद को ही न पहचान सके,
जब टकराये खुद से ही हम।


जब-जब याद करें वो लम्हें,
आंखें भूल गई ज्योती,
टूटे माला के मनको-सी,
टपक रहे मन के मोती।



सपने रह-रह तङपाते हैं,
अफसाने....बस बन जाते हैं,
जैसे कोरे कागज में रखी हो,
अपनी कोरी बात कोई।



दीवारों मे चिन जाए यादें,
कोई तो ऐसा जतन करें,
मासूम-सा दिल है,
बहल जाएगा, ऐ “तारिका”
फिर कुछ मीठा सुन करके।
.............
प्रीती बङथ्वाल "तारिका "
(चित्र - साभार गूगल)