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Thursday, April 2, 2009

माता तेरे रुप हजार तू ही करती बेङा पार......





तू ही अम्बे तू जगदम्बे,
माता तेरे रुप हजार,
तू ही काली तू ही दुर्गे,
तू ही करती बेङा पार।


तेरे दर्शन के अभिलाषी,
आंखे दर्शन के बिन प्यासी,
प्यास बुझादे अबकी बार,
माता तेरे रुप हजार,
तू ही करती बेङा पार।


तुम हो वैष्णों पहाङा वाली,
मां, तुम सब भक्तों को प्यारी,
प्यार लुटादो तुम भी आज,
माता तेरे रुप हजार,
तू ही करती बेङा पार।


तुम ही वीणा की तारों में,
तुम ही राग और मल्हारों में,
तुम ही बनी, प्रकृति की आवाज,
माता तेरे रुप हजार,
तू ही करती बेङा पार।


सागर की लहरों में तुम हो,
ठण्डी पवन बहाती तुम हो,
सृष्टी रचना में, तुम हो सार,
माता तेरे रुप हजार,
तू ही करती बेङा पार।
.................
प्रीती बङथ्वाल "तारिका"
(चित्र -साभार गूगल)

Tuesday, October 7, 2008

जगत जननी मां अम्बे

जगत जननी, जगत अम्बे
तू है मां वर दायनी,
सृष्टी की रचना में तू मां,
तू ही सृष्टी नाशनी।

तू ही अम्बर ,तू धरा मां,
प्रकृति ये तेरी गोद है,
दे रही आंचल, हवा मां,
तेरी नजर, चारों और है।

कर दया मां, हम हैं नादा,
भूल हुई जो माफ करना,
तू है ममता की धनी मां,
हम तो तेरे फूल है।
.............
प्रीती बङथ्वाल "तारिका"
(आप सभी को नवरात्रों की शुभकामनाऐं। मां दुर्गा सभी को अपना ममता रुपी आशिर्वाद दें यही मां अम्बे से प्रार्थना करती हूं )
(चित्र - सभार गुगल)