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Friday, September 12, 2008

मुझे इंतज़ार है फिर भी

चिराग़ जल के मेरा,
बुझ जाएगा,
मुझे इन्तज़ार है फिर भी,
कि तू आएगा,
खुली आंखों में न सही,
बन्द पलकों के तले,
वो एक आंसू की बूंद-सा,
ठहर जाएगा,
मुझे इन्तज़ार है फिर भी,
कि तू आएगा।
न इस तरहा से मुझे,
भूल जाने की कौशिश कर,
मैं तेरा ही ख्वाब हूं,
तू मुझे भूल नही पाएगा,
मुझे इन्तज़ार है फिर भी,
कि तू आएगा।
..............
प्रीती बङथ्वाल "तारिका"
(चित्र- सभार गुगल )

Thursday, August 28, 2008

फिर भी जीवन जी रहा


ये हवाऐँ छेङती है,
क्यों मुझे कुछ इसतरहां
सिमटा हुआ आँचल मेरा,
मचल उठता है बादलों में।

खुल रहे केसू भी,
जो अब तक कैद थे.
इन चोटियों में,
और लटें गुदगुदाने लगीं हैं,
कोमल कपोलों को मेरे।


दुर से आती हवाऐं,
ला रही पैगाम किसका,
जिसकी खुशबू की महक,
इन वादियों में बिखरी हुई है।

मैं करुं इंतज़ार उसका,
जो तसव्वुर में ही रहा,
न स्वप्न है न ही हक़ीकत,
फिर भी जीवन जी रहा।
...............
प्रीती बङथ्वाल "तारिका"

Tuesday, August 26, 2008

मेरे किसी ख्वाब में

ऐसा नहीं कि,
तेरी याद में,
ये आंखे रोई नहीं,
इनको सज़ा मिली है,
ये अभी तक, सोई नहीं,
ये एक वक्त से खुली हैं,
बस इस इंतज़ार में,
शायद तू नज़र आए इन्हें,
मेरे किसी ख्वाब में।
................
प्रीती बङथ्वाल "तारिका"

Saturday, August 9, 2008

सिर्फ इंतज़ार होगा.......

कुछ ख्वाब,
जो एक उम्मीद के सहारे थे,
वो, जो अपनी मंजिल से,
कुछ दूर, किनारे पे थे,
शायद इस इंतज़ार में थे,
कि उनको भी कोई सहारा देगा,
अपनी कश्ती से,
उनको भी किनारा देगा,
न मालूम था,
कभी न खत्म होने वाला,
ये इंतज़ार होगा,
ये इंतज़ार एक बार नहीं,
बार-बार होगा,
जब तक कि ये आंसू थम न जाए,
जब तक कि ये सांसे रुक न जाए,
सिर्फ इंतज़ार....इंतज़ार......
इंतज़ार होगा।
...............
प्रीती बङथ्वाल "तारिका"

Thursday, July 24, 2008

इसी इंतज़ार में............


रूठी इन तकदीरों में,
हंसी भी मुस्कुरायेगी,
इसी इंतजार में शायद,
जिन्दगी बीत जाएगी।
कुछ खुले पन्ने थे,
तकदीर के रास्ते में,
जो जल गये थे शायद,
किसी हादसे में।
आंसुओं की बारिश थी,
पलकों की परछाइयों में,
फिर वही ख्वाहिश थी,
मेरी तन्हाइयों में।
शायद वो हवा फिर आएगी,
जो मेरी तन्हाइयों के साथ,
मुस्कुरायेगी,
इसी इंतजार में शायद,
जिन्दगी बीत जाएगी।
…………
प्रीती बङथ्वाल “तारिका”