Thursday, July 24, 2008

इसी इंतज़ार में............


रूठी इन तकदीरों में,
हंसी भी मुस्कुरायेगी,
इसी इंतजार में शायद,
जिन्दगी बीत जाएगी।
कुछ खुले पन्ने थे,
तकदीर के रास्ते में,
जो जल गये थे शायद,
किसी हादसे में।
आंसुओं की बारिश थी,
पलकों की परछाइयों में,
फिर वही ख्वाहिश थी,
मेरी तन्हाइयों में।
शायद वो हवा फिर आएगी,
जो मेरी तन्हाइयों के साथ,
मुस्कुरायेगी,
इसी इंतजार में शायद,
जिन्दगी बीत जाएगी।
…………
प्रीती बङथ्वाल “तारिका”

Sunday, July 20, 2008

एहसास हो रहा है.......

पहले भी तेरे दर्द का,
एहसास था मुझे,
आज भी उस दर्द का,
एहसास हो रहा है।
आखों में नमी थी,
उस वक्त भी मेरे,
आज भी उस नमी का,
एहसास हो रहा है।
जो खा़ब कल तेरे थे,
आज मेरी आखों में नजर आते है।
जिन एवानों को तूने बनाया था,
उनको आज हम सजाते हैं।
ख्वाहिश है तेरे मंका में,
एक तस्वीर ही बन जाऊं।
कभी तो तेरी नजरें करम होंगी,
और मैं भी एक बार संवर जाऊं।
रात के तसव्वुर में,
ये सफर हो रहा है।
आखों में नमी थी,
उस वक्त भी मेरे,
आज भी उस नमी का,
एहसास हो रहा है।
...........
प्रीती बङथ्वाल "तारिका"

Friday, July 18, 2008

भुलाये न गए.......



मुझसे मेरी तन्हाइयों के,
खाब भी भुलाये न गए,
दिल में जो ज़ख्म थे,
आखों से छुपाए न गए,
महफिलों में रहकर भी,
जिन्हें भूलना चाहा,
यादें ऐसी थी कि,
जो भूल कर भी भुलाये न गए।
टीस के मोती बन गये हैं,
दिल के आस-पास,
अब वो तूफान उबल रहे हैं,
दिल के आस-पास,
जिनकी रूहों को हमने,
तारीक़ में छुपाया,
मगर फिर भी वो,
हमसे छुपाये न गए,
यादें ऐसी थी कि,
जो भूल कर भी भुलाये न गए।


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प्रीती बङथ्वाल "तारीका"