अभी फिलहाल
की ही बात है, हमारी सोसायटी में तीज का त्यौहार मनाया गया। इसमें ‘तीज क्वीन’ कॉन्टैस्ट रखा गया। काफी महिलाओं ने इस में भाग लिया। मैं भी उनमें शामिल हो गयी। सोचा साफ-सुथरा सीधा-साधा सा प्रोग्राम होगा, शामिल हो लेते है और साथ के लोगों ने भी काफी जोर दिया हुआ था। सो मैं भी लग गयी लाइन में। पूरा सोलह श्रंगार कर, सज-धज कर पहुंच गये। शुरूवात में ही बारिश की बौछार ने हम सभी का स्बागत किया।धिरे-धिरे ये प्रोग्राम आगे बढने लगा और हम सब को, जो कि तीज क्वीन में भाग लेने आये थे एक-एक नम्बर थमा दिये गये। अपने नम्बर के साथ सभी लाइन से स्टेज पर खङे हो गए। वैसे पहले ही राउंड में काफी महिलाएं बाहर होगई और कुल 10 महिलाएं ही बची रह गई, उनमें मैं भी थी। अब बारी थी डांस और गाने की। कुछ ने डांस किया, कुछ ने गाना गाया और कुछ ने कुछ भी नही किया। मैंने दोंनो में नाम लिखा रखा था तो मेरा डांस गाना दोंनो ही थे। जिसे जो आता है वो ही करना था। मगर मुझे डांस के लिए तो बोला गया पर गाने के लिए न
हीं बुलाया गया। मैं एक बार उन्हें बताने भी गई लेकिन फिर भी मुझे गाने के लिए नही कहा गया। पता नही क्या हो रहा था। लेकिन मैं, दोंनो ही में वहां खङे सभी 10 में सबसे अच्छी थी, ये वहां बैठे सभी लोगों ने, मुझसे मेरा डांस देखने के बाद ही कहा था। तो लगा शायद मैं तीजक्वीन के खिताब के सबसे ज्यादा नजदीक हूं । जैसे-जैसे समय नजदीक आ रहा था सभी की उत्सुकता बढती जा रही थी। यहां वोटिंग से तीज क्वीन चुनी जानी थी। सभी को माइक द्वारा अपना नाम और नम्बर बताना था। लेकिन एक लेडी स्टेज से उतर कर लोंगो के पास जा जा कर घूम रही थी और उसपर ओपजैक्सन करने वाला कोई भी नहीं। उस पर किसी ने ध्यान नहीं दिया।कुछ समय बाद नतीजे आने शुरू हुए। डांस में मेरा और मेरे साथ वाली का नाम आया लेकिन गिफ्ट तो एक था सो दोंनो के नाम की चिट डाल कर निकाली गई वहां किस्मत ने साथ छोङ दिया। काफी इंतजार के बाद जिसके लिए इतना श्रंगार किए हुए थे, वो घङी आ ही गई। उसमें भी बाजी उसके हाथ आयी जिसने न तो डांस किया और न ही गाना गाया, साथ ही ये वही बहन थीं जो घूम घूम कर अपना प्रर्दशन कर रही थीं। इससे बङी खबर तो हमें बाद में पता लगी कि वो सोसायटी के प्रेजीडेंट की बहू थी जो पूरे सोलह श्रंगार
में भी नही थी, जिसके लिए हमने सारा दिन लगा दिया था। और तो और हद वहां नजर आई जब साथ के लोंगो ने बताया कि उनकी ननद, भाभी का नम्बर पर्ची पर लिखवाने के लिए सभी को फ्रैंडशिप बेंड बांध रही थी। वाहजी वाह प्रेजीडेंट की बहू होने का इतना बङा फायदा कुछ न करो तब भी सब कुछ मिले।इस ‘तीज क्वीन’ प्रोग्राम की वजह से ही मैं कुछ दिन से ब्लॉग नही लिख पा रही थी। समय मिला तो लगा अब आप सब के साथ अपने मन की बात बतलाऊं। अगर ऐसे ही किसी प्रतियोगिता को जीता जा सकता है तो काश मेरे ‘वो’ भी प्रेजीडेंट होते तो मेरा ताज भी कहीं नहीं गया होता।
प्रीती बङथ्वाल
